गुर्दे की सेहतKidney Health
गुर्दे शरीर का ख़ून साफ़ करते हैं और पानी-नमक का हिसाब सँभालते हैं। इनका काम कम होने लगे तो सूजन, थकान और भूख में फ़र्क़ दिखने लगता है।
गुर्दे की तकलीफ़ की सबसे बड़ी दिक़्क़त यह है कि शुरुआत में पता नहीं चलता। बहुत बार पैरों या चेहरे पर सूजन, थकान, या पेशाब में बदलाव के रूप में पहला इशारा मिलता है।
शुगर और ब्लड प्रेशर वालों में गुर्दे पर असर पड़ने का ख़तरा ज़्यादा रहता है, इसलिए समय-समय पर जाँच करवाना ज़रूरी है। पुरानी रिपोर्ट साथ ले आइए — इससे बदलाव समझने में मदद मिलती है।
जिन परेशानियों में लोग दिखाने आते हैं
इनमें से कोई बात आपसे मिलती-जुलती लगे तो एक बार दिखा लीजिए।
- गुर्दे की पथरी
- पेशाब में जलन या संक्रमण (UTI)
- पैरों और चेहरे पर सूजन
- पेशाब में झाग आना
- बार-बार या रात में ज़्यादा पेशाब
- क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ आना
- शुगर या बी.पी. के साथ गुर्दे की जाँच
- कमर के पिछले हिस्से में दर्द
कब देर नहीं करनी चाहिए
नीचे दी गई कोई बात दिखे तो इंतज़ार मत कीजिए — तुरंत डॉक्टर को दिखाइए या नज़दीकी अस्पताल जाइए।
- पेशाब बहुत कम होना या बिलकुल बंद हो जाना
- पेशाब में ख़ून आना
- तेज़ कमर दर्द के साथ उल्टी या बुख़ार
- अचानक बहुत ज़्यादा सूजन आ जाना
- साँस फूलना या बहुत ज़्यादा कमज़ोरी
दिखाने आने पर क्या होता है
कोई लंबी प्रक्रिया नहीं। चार बातें, हर मरीज़ के साथ एक जैसी।
आपकी पूरी बात सुनी जाती है
तकलीफ़ कब से है, कैसे बढ़ती है, खान-पान और नींद कैसी है — सब पूछा जाता है। बीच में टोका नहीं जाता।
जाँच और पुरानी रिपोर्ट देखी जाती है
आमने-सामने जाँच होती है। पुरानी रिपोर्ट या चल रही दवा साथ हो तो वह भी देखी जाती है।
आसान भाषा में सलाह और छपी पर्ची
क्या करना है, कौन सी दवा कब और कितने दिन — सब पर्ची पर लिखा मिलता है, ताकि घर पर उलझन न हो।
दवा और दोबारा कब दिखाना है
दवा क्लिनिक के काउंटर पर मिलती है, या घर तक भेजी जा सकती है। अगली बार कब आना है, यह भी बता दिया जाता है।
घर पर ध्यान रखने की बातें
ये आम सलाह है। आपके लिए क्या ठीक है, यह दिखाने के बाद तय होता है।
- पानी कितना पीना है, यह डॉक्टर से पूछकर तय कीजिए
- खाने में नमक कम रखिए, अचार-पापड़ घटा दीजिए
- दर्द की दवा अपने मन से लंबे समय तक मत लीजिए
- शुगर और बी.पी. की जाँच नियमित करवाइए
गुर्दे की सेहत — एक बार दिखा लीजिए
पहले से समय ले लेने पर इंतज़ार कम होता है। आना मुश्किल हो तो मोबाइल पर वीडियो से भी बात हो सकती है।
यह पृष्ठ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी परेशानी की जाँच और इलाज डॉक्टर से मिलने के बाद ही तय होता है। आपातकाल में तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाइए।
