कान, नाक और गलाEar, Nose & Throat
बार-बार ज़ुकाम, नाक बंद रहना या गले का दर्द नींद और रोज़ के काम, दोनों बिगाड़ देता है। बच्चों में यह पढ़ाई पर भी असर डालता है।
कान, नाक और गले की परेशानियाँ आम हैं, इसलिए लोग इन्हें टालते रहते हैं। पर पुराना ज़ुकाम, बार-बार टॉन्सिल की सूजन या कान का बहना लंबे समय में सुनने और नींद पर असर डाल सकता है।
धूल, धुआँ, बदलता मौसम और खेतों में काम — गाँव में ये सब मिलकर नाक और गले पर ज़ोर डालते हैं। कारण समझकर इलाज तय करना ज़्यादा काम करता है, बजाय हर बार वही दवा लेने के।
जिन परेशानियों में लोग दिखाने आते हैं
इनमें से कोई बात आपसे मिलती-जुलती लगे तो एक बार दिखा लीजिए।
- पुराना ज़ुकाम और नाक बंद रहना
- साइनस का दर्द और सिर भारी रहना
- एलर्जी — छींक, नाक बहना, आँखों में खुजली
- गले में दर्द, टॉन्सिल की सूजन
- कान में दर्द या कान बहना
- कान में आवाज़ आना (टिनिटस)
- कम सुनाई देना
- आवाज़ बैठना
कब देर नहीं करनी चाहिए
नीचे दी गई कोई बात दिखे तो इंतज़ार मत कीजिए — तुरंत डॉक्टर को दिखाइए या नज़दीकी अस्पताल जाइए।
- कान से ख़ून या बदबूदार पानी आना
- अचानक एक कान से सुनना बंद हो जाना
- एक ही तरफ़ की नाक लगातार बंद रहना, उसमें से ख़ून आना
- दो हफ़्ते से ज़्यादा आवाज़ बैठी रहना
- निगलने या साँस लेने में तकलीफ़
दिखाने आने पर क्या होता है
कोई लंबी प्रक्रिया नहीं। चार बातें, हर मरीज़ के साथ एक जैसी।
आपकी पूरी बात सुनी जाती है
तकलीफ़ कब से है, कैसे बढ़ती है, खान-पान और नींद कैसी है — सब पूछा जाता है। बीच में टोका नहीं जाता।
जाँच और पुरानी रिपोर्ट देखी जाती है
आमने-सामने जाँच होती है। पुरानी रिपोर्ट या चल रही दवा साथ हो तो वह भी देखी जाती है।
आसान भाषा में सलाह और छपी पर्ची
क्या करना है, कौन सी दवा कब और कितने दिन — सब पर्ची पर लिखा मिलता है, ताकि घर पर उलझन न हो।
दवा और दोबारा कब दिखाना है
दवा क्लिनिक के काउंटर पर मिलती है, या घर तक भेजी जा सकती है। अगली बार कब आना है, यह भी बता दिया जाता है।
घर पर ध्यान रखने की बातें
ये आम सलाह है। आपके लिए क्या ठीक है, यह दिखाने के बाद तय होता है।
- भाप लेना नाक बंद में आराम देता है
- कान में तेल, तिनका या कोई चीज़ मत डालिए
- धूल-धुएँ वाले काम में कपड़ा या मास्क बाँध लीजिए
- बहुत ठंडा और खट्टा गले की तकलीफ़ बढ़ा देता है
कान, नाक और गला — एक बार दिखा लीजिए
पहले से समय ले लेने पर इंतज़ार कम होता है। आना मुश्किल हो तो मोबाइल पर वीडियो से भी बात हो सकती है।
यह पृष्ठ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी परेशानी की जाँच और इलाज डॉक्टर से मिलने के बाद ही तय होता है। आपातकाल में तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाइए।
