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कमर, गर्दन, जोड़

कमर और रीढ़ का दर्दSpine & Back Pain

कमर, गर्दन और घुटने का दर्द खेत-मज़दूरी से भी बढ़ता है और घंटों बैठे रहने से भी। दोनों का कारण अलग होता है, इसलिए सलाह भी अलग होती है।

कमर और रीढ़ का दर्द — SB Health Centre

रीढ़ शरीर का भार उठाती है और हाथ-पैर तक जाने वाली नसें इसी से निकलती हैं। इसलिए कमर या गर्दन की तकलीफ़ कई बार पैर या हाथ में दर्द, झुनझुनी या कमज़ोरी बनकर दिखती है।

ज़्यादातर कमर दर्द बिना बड़े इलाज के सँभल जाता है, बशर्ते कारण समझ लिया जाए और उठने-बैठने का तरीका ठीक कर लिया जाए। कुछ हालात में देर करना ठीक नहीं होता — वो नीचे दिए हैं।

कमर, गर्दन, जोड़

जिन परेशानियों में लोग दिखाने आते हैं

इनमें से कोई बात आपसे मिलती-जुलती लगे तो एक बार दिखा लीजिए।

  • कमर का पुराना दर्द
  • गर्दन का दर्द और जकड़न
  • साइटिका — कमर से पैर तक जाने वाला दर्द
  • स्लिप डिस्क
  • सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस
  • घुटनों और जोड़ों का दर्द
  • मांसपेशियों में जकड़न और खिंचाव
  • चोट के बाद बना रहने वाला दर्द

कब देर नहीं करनी चाहिए

नीचे दी गई कोई बात दिखे तो इंतज़ार मत कीजिए — तुरंत डॉक्टर को दिखाइए या नज़दीकी अस्पताल जाइए।

  • पैर या हाथ में कमज़ोरी, सुन्नपन या झुनझुनी
  • पेशाब या मल पर काबू न रहना
  • गिरने या चोट लगने के बाद तेज़ दर्द
  • रात में बढ़ने वाला दर्द, साथ में बुख़ार या वज़न घटना
  • दोनों पैरों में एक साथ कमज़ोरी
क्लिनिक पर

दिखाने आने पर क्या होता है

कोई लंबी प्रक्रिया नहीं। चार बातें, हर मरीज़ के साथ एक जैसी।

आपकी पूरी बात सुनी जाती है

तकलीफ़ कब से है, कैसे बढ़ती है, खान-पान और नींद कैसी है — सब पूछा जाता है। बीच में टोका नहीं जाता।

जाँच और पुरानी रिपोर्ट देखी जाती है

आमने-सामने जाँच होती है। पुरानी रिपोर्ट या चल रही दवा साथ हो तो वह भी देखी जाती है।

आसान भाषा में सलाह और छपी पर्ची

क्या करना है, कौन सी दवा कब और कितने दिन — सब पर्ची पर लिखा मिलता है, ताकि घर पर उलझन न हो।

दवा और दोबारा कब दिखाना है

दवा क्लिनिक के काउंटर पर मिलती है, या घर तक भेजी जा सकती है। अगली बार कब आना है, यह भी बता दिया जाता है।

घर पर

घर पर ध्यान रखने की बातें

ये आम सलाह है। आपके लिए क्या ठीक है, यह दिखाने के बाद तय होता है।

  • भारी वज़न घुटने मोड़कर उठाइए, कमर झुकाकर नहीं
  • एक ही स्थिति में घंटों मत बैठिए, बीच-बीच में उठिए
  • हल्की स्ट्रेचिंग रोज़ कीजिए, पर दर्द बढ़े तो रोक दीजिए
  • गद्दा बहुत नरम न हो, तकिया ऊँचा न रखिए

कमर और रीढ़ का दर्द — एक बार दिखा लीजिए

पहले से समय ले लेने पर इंतज़ार कम होता है। आना मुश्किल हो तो मोबाइल पर वीडियो से भी बात हो सकती है।

यह पृष्ठ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी परेशानी की जाँच और इलाज डॉक्टर से मिलने के बाद ही तय होता है। आपातकाल में तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाइए।